Skip to content

Question

Directions For Questions
दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
कौओं के आश्रयदाता वृक्षों को ऋग्वेद में काकाम्बीर कहा गया है। ऐसे वृक्षों की मालिका में ही नीम को शुमार किया जाना चाहिए। हर साल कौओं के कितने ही घोंसले नीम के पेड़ पर पाये जाते हैं। वैशाख माह में कौए यदि इस पेड़ पर घोंसले बनाते हैं तो इसे समृद्धि का लक्षण माना जाता है। एक तरह से यह आगामी खुशहाली का संकेत होता है। वैसे कौए की आवाज़ कितनी भोंडी और कर्कश होती है! लेकिन काकाम्बीर के घोंसले में बैठे कौए की महीन और चुलबुली आवाज़ जो एक बार सुन ले वह अवश्य ही मोहित हो जाता है, क्योंकि उसके कंठ से चाशनी-पगे स्वर जो निकल रहे होते हैं...!
निबौरी के बीज से तेल निकाला जाता है, जो 'मारगोसा' कहलाता है। कीटनाशक दवाइयाँ बनाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। वात-विकार के मामले में मालिश करने के लिए भी यह तेल उपयुक्त पाया जाता है।
नीम की लकड़ी ठोस और मज़बूत होने से पानी के जहाज़ बनाने के काम में यह प्रयुक्त होती है। खिलौने, कृषि के औज़ार तथा बैलगाड़ियाँ बनाने के लिए भी नीम की लकड़ी उपयुक्त होती है।
जिन पेड़ों पर कौए घोंसला बनाते हैं, ऋग्वेद में उन्हें किस नाम से संबोधित किया गया है?

Options

Choose one · Correct answer highlighted

Explanation

गद्यांश के अनुसार काकाम्बीर सही उत्तर है क्योंकि पाठ में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

Discussion

Comments

0 comments

No comments yet. Be the first to start the discussion.