Practice question
Question
Directions For Questions
निर्देशः नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारतेंदु युग में नाटक साहित्य ही प्रधान काव्य रूप बन गया था। किन्तु बाद में नाट्य-रचनाएँ कम हो गईं। इस क्षेत्र में जयशंकर प्रसाद ने महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके नाटकों से हिन्दी साहित्य में बहुत बड़े अभाव की पूर्ति हुई | नाट्य-रचना का विधान प्राचीन काव्य शास्त्र में विस्तार से किया गया है। हिन्दी नाटककारों ने उस विधान को ज्यों का त्यों स्वीकार नहीं किया। नांदी, मंगलाचरण, प्रस्तावना को हटाया जाने लगा। विष्कंभक, प्रवेशक, आदि का विधान छोड़ दिया गया। विदूषक के बदले कोई मनोरंजक पात्र रखा जाने लगा। सांचे में ढल हुए पात्रों के स्थान पर निजी व्यक्तित्व की विशेषताओं से युक्त पात्र आने लगें।
हिन्दी नाटक के संदर्भ में कौन सा कथन गलत है?
Explanation
गद्यांश के अनुसार प्राचीन काव्यशास्त्र के विधान को ज्यों का त्यों स्वीकार किया। सही उत्तर है क्योंकि पाठ में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
Discussion
Comments
Please log in to join the discussion.
Login to commentNo comments yet. Be the first to start the discussion.